मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

बादल

मिलना चाहती थी स्याह बादलों से
जो बरस पड़ते हैं
इस बिखरती हुयी आधी रात को
खाली खुले छत पर
चाँद की रौशनी में
बुलाते हैं रात भर
बुलाते हैं
नीले और आसमानी बादल ...
कहते हैं तुम्हारे शहर में आयें हैं
पीली मिट्टी के रास्तों
मोहगनी के घने पेड़ से गुजरकर
तुम्हारी गली में बरस रहे हैं
वे बड़े नसीब वाले हैं राहगीर
जो कायनाती आसमान का दीदार करते हैं
तारों के उजास में
बादलों के सीने से लिपटे
खुली छत पर भीगते रहते
भीगते जाते ......nivedita
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