शनिवार, 18 अगस्त 2012

wah mari gayi

वह मारी गयी
 वह मारी गयी या मार दी गयी 
क्या फर्क परता है उसके जीवन का अंत कैसे हुआ
मौत पुलिस के फाइल में  बंद  है  
या उसके नोट बुक में 
पुलिस कहती है छत्तीसगढ़ के बीहर जंगलों में उसकी लाश मिली थी 
उसके जुरे में लगे पलाश के फूल सूरज की तरह दमक  रहे थे 
कितनी निर्भीक थी उसकी आखें 
अधखुली स्वपन से  भींगी   
उसकी देह से आती महुवा की गंध से पूरा जंगल महक उठा 
लहू से  भींगी  जंगल की जमीं पर खिल आये थे कनेर के फूल 
दहक रही थी लाली 
वे सब खामोश खर्डे थे
नंग धरंग बच्चे
औरतें ,लोगों का हुजूम
 पुलिस  ने हवा में  गोलियां चलायीं 
की लोग लौट जाएँ उसी दिशा में जहाँ से आयें हैं
नन्नें न्न्ने पांव 
जवान आखें 
 औरतों का रुदन 
मीलों गूंजता रहा 
वे रो रही थीं  या गा रही थीं 
शब्द भींग रहे थे
टूट रहा था आसमान
उबल रही थी धरती
दरक रहे थे पहाड़
वे गाती रहीं
रोतीं रहीं 
वे सब के सब खरे रहे 
कई दिनों तक घेरा बनाकर
कहतें हैं आज भी उस दिशा से आती है आवाज
तुम कभी अगर  गुजरो  मेरे दोस्त 
उस दिशा से आती महुवा की गंध बाँध लेगी और 
 अगर रात सियाह हो
तो जाना जंगल के बीचों बीच
जहाँ दमकता होगा लाल सूरज 
उसके जुरे में खिले गुलाब की तरह    






मंगलवार, 7 अगस्त 2012

बेटे के लिए
महसूस कर सकती हूँ
तुम्हारे भीतर हो रहे बदलाव को
उस हवा को भी जो तुमको छू कर गुजरती है
पहचानती हूँ उस बहाव को
जहाँ से शुरू होती है सपनों की धरती
फूट परने को आतुर
तुम्हारे पास जिन्दगी के नए अनुभव हैं
मेरे पास अनुभवों से गुजरते हुए
जीवन की यादें और गाथाएं
फिर क्यों लगता है की हमदोनो
दो युगों की तरह हैं
क्या कोई राह है
जो एक दूसरे से मिलती हों
उठो अगुआई करो और भर लो इस सिस्ट्री को
सौपती हूँ तुम्हें अतीत के सपने
पूर्वजों की आवाज
नए समय में जरूरत होगी तुम्हें
हो सकता है
आने वाले समय में
तुम नहीं देख सको
ये जंगल
ये पहाड़
ये धरती
और बसंत का खिलना
जब उजली धुली सुमद्र की लहरें
नहीं कर रही हो तुम्हारा आलिगंन
जब नहीं सुन सकों हवाओं में देवदार के गीत
तुम याद करना पूर्वजो को
जो दे गयें है
घने जंगल का रहस्समई स्वर
नगाड़ों की थाप
बसंत के मुख़्तसर सपने
बुरे और पराजीत समय में भी वे देंगे साथ
यह समय पूंजी का है
पूंजी जहाँ होती है वहां नहीं होते सपनें
सपने और भूख की लगेगी बोली
जब धरती आकाश सब होगा उनके नियंत्रण में
नहीं बचेगा महान सभ्यता का कोई अवसेश
जहाँ नहीं होगी पेरो के नीचे ठोस जमीं
नहीं होगा सतरंगो से घीरा आसमान
यदि तुम रोक सको तो रोकना
अपनी पूरी ताकत से
विचार से
ये दुनिया हमारी है
हमारी यादों और जीवन से लबरेज
गरम लोहे सी लाल धरती हमारी है
धरती सा एस्पन्दित हमारा हिरदय
हमारी आत्मा
सौपती हूँ तुम्हें
सौपती हूँ मुक्ति का स्वप्न
ये गीत तुम्हें ही गाने होगें
कहना होगा
जलो जलो पुरातन पृथ्वी
नछत्र सौरमंडल जलो
जल अतल जलो