वह मारी गयी
वह मारी गयी या मार दी गयी
क्या फर्क परता है उसके जीवन का अंत कैसे हुआ
मौत पुलिस के फाइल में बंद है
या उसके नोट बुक में
पुलिस कहती है छत्तीसगढ़ के बीहर जंगलों में उसकी लाश मिली थी
उसके जुरे में लगे पलाश के फूल सूरज की तरह दमक रहे थे
कितनी निर्भीक थी उसकी आखें
अधखुली स्वपन से भींगी
उसकी देह से आती महुवा की गंध से पूरा जंगल महक उठा
लहू से भींगी जंगल की जमीं पर खिल आये थे कनेर के फूल
दहक रही थी लाली
वे सब खामोश खर्डे थे
नंग धरंग बच्चे
औरतें ,लोगों का हुजूम
पुलिस ने हवा में गोलियां चलायीं
की लोग लौट जाएँ उसी दिशा में जहाँ से आयें हैं
नन्नें न्न्ने पांव
जवान आखें
औरतों का रुदन
मीलों गूंजता रहा
वे रो रही थीं या गा रही थीं
शब्द भींग रहे थे
टूट रहा था आसमान
उबल रही थी धरती
दरक रहे थे पहाड़
वे गाती रहीं
रोतीं रहीं
वे सब के सब खरे रहे
कई दिनों तक घेरा बनाकर
कहतें हैं आज भी उस दिशा से आती है आवाज
तुम कभी अगर गुजरो मेरे दोस्त
उस दिशा से आती महुवा की गंध बाँध लेगी और
अगर रात सियाह हो
तो जाना जंगल के बीचों बीच
जहाँ दमकता होगा लाल सूरज
उसके जुरे में खिले गुलाब की तरह
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