सोमवार, 23 जून 2014

 तुम साथ होते हो 

तुम साथ होते हो
तो दुनिया
अपनी सी होती
नींद
ख्वाब लिए आती है
ख्वाब मेरी रातों में रंग भरते
रात उतरती है
नर्म-नर्म
मुलायम
सपने लिए और मैं झुकती हूँ पृथ्वी को चूमने !
पृथ्वी है तो सपने उगते रहेंगे
सपने हैं तो प्रेम बसा रहेगा हमारे दिलों में....निवेदिता

माँ के नाम बच्चियों के खत

मेरी माँ

नहीं गाना हमारे लिए कोई शोक गीत

दुख के अंधेरे में अगर साहस के साथ

सामना कर सको तो करना

उन प्रचंड रातों का

और याद रखना कि तुम्हारी बच्चियां

खून से भरे ,शोक के फर्श पर

अंतिम दम तक लड़ती रही थी

माँ

हमें मत याद करना किसी स्मृति प्रेत की तरह

हम तो फिर उग आये हैं

आम के गाछ पर हरी हरी पत्तियों में

पेड़ों के जड़ों के नीचे

बहुत पास

माँ

तुम झूला डालना

हल्की नीलाभ -श्वेत रस्सियों पर

हम उंचे -उंचे उड़ते जायेंगे

तुम अफ़सोस मत करना

अफ़सोस काफी नहीं है

ना करना भरोसा खुदा के रहम और माफ़ी पर

खून से लथपथ मेरे शरीर को जब वे नोच रहे थे

मेरी आँखों में दहक रहा था चाँद

मेरी सलवार पर उग आये थे

ढ़ेर सारे पलाश के लाल लाल फूल

उस दुख और पीड़ा में मैं सोच रही थी

उन बच्चों के बारे में जो

गैस चेंबर में मार दिए गए थे



मुझे पता है तुम लड़ रही हो अपनी दुबली पतली काया से

पुलिस की फाईलो से, न्यायालय से

शोक मत करो हम उग आयेंगे

खेतों में गीली मिट्टी में तुम्हारे हाथों की नमी में उसी
,
सूखी दहकती जमीं में हम फिर लहलहायेगे

तुम्हारी ही कोख में माँ

निवेदिता