बुधवार, 17 अक्टूबर 2012

संस्कृति और धर्म दो अलग अलग चीजे है .आम तौर पर हम दोनों का घालमेल कर देते है . मेरा धर्म में विशवास नहीं है . पर संस्कृति मेरे रगों में बहती है . किसी भी देश को जानने का सब से बेहतर तरीका है यह जानने की कोशिश करना की किस तरह से लोग रहते है , जीते है , प्यार करते है . मुझे मेरा शहर इसलिए अच्छा लगता है . यहाँ की संस्कृति में खूब सारे रंग है . दशहरा मेरी यादो में एसे घुला मिला है  जैसे पानी में चीनी . संस्कृति की यही मिठास आपको आपकी जड़ों से जोड़ कर रखती है .  हजारों की तादात में लोगों का हुजूम सारी रात सरकों पर जशन मनाता है . रौशनी  ऐसे  बरसती है जैसे आसमान में सूरज बरसते है .

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